CDP: विकास की अवधारणा और अधिगम के साथ उसका सम्बन्ध नोट्स पार्ट 2


CDP: विकास की अवधारणा और अधिगम के साथ उसका सम्बन्ध नोट्स पार्ट 2

आजकल अधिकांश विद्यालयों में समग्र समूह के लिए प्राथमिक ध्यान आधारित होता है—

आयु स्तर पर

Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2013

बालक की प्रथम पाठशाला है—

परिवार

Bihar TET Paper-I (Class I-V) 2013
Rajasthan TET (VI-VIII) 2012
MP TET (I-V) 2011

निम्न परिवारों के बच्चे जो छोटे आकार के परिवार से सम्बन्ध रखते हैं उनके विकास के बेहतर वातावरण पाने के मौके होते हैं क्योंकि उन्हें बड़े परिवारों के निम्न बच्चों की अपेक्षा—

बेहतर परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं

MP TET Paper-I (Class I-V) 2011

........... के अतिरिक्त सभी वातावरणीय कारक विकास को आकार देते हैं।

शारीरिक गठन

DSSSB PRT
CTET-2012 (VI-VIII)

........... कथन बच्चे के विकास में परिवेश की भूमिका का समर्थन करता है।

 

पिछली कुछ शताब्दियों में बुद्धि लब्धांक परीक्षा में विद्यार्थियों के औसत प्रदर्शन में लगातार वृद्धि हुई है

CTET Paper-II (Class VI-VIII) 28 July 2013

V. विकास की अवस्थाएँ

बच्चों में लिंग पहचान स्थापित होती है—

2 वर्ष से

H TET (I-V) 11.11.2019

विकासात्मक कार्य’ प्रतिपादित किया था—

हैविगर्स्ट

HP TET (Arts) Nov. 2019

मानव विकास का सही क्रम है—

शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था

Haryana TET Paper-I (Class I-V) 1 Feb 2014
DSSSB PRT
CTET-2015 (I-V)

जन्मोत्तर (जन्म के बाद की) विकास की दूसरी प्रमुख अवस्था है—

बाल्यावस्था

Bihar TET Paper-II (Class VI-VIII) 2013

शैशवावस्था होती है—

पाँच वर्ष तक

CG TET Paper-I (Class VI-VIII) 2014

बाल्यावस्था अवस्था होती है—

बारह वर्ष तक

CG TET Paper-I (Class I-V) 2011
Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2015

मध्य-बचपन अवधि है—

6 वर्ष से 11 वर्ष

DSSSB PRT
CTET-2016 (VI-VIII)

प्रारंभिक बचपन की आयु मानी जाती है—

2 से 6

MP TET (VI-VIII) 26 Feb 2019

आयु समूह पूर्ववर्ती बाल्यावस्था श्रेणी के अन्तर्गत आता है—

6 से 11 वर्ष

CTET Paper-I (Class I-V) 22 Feb 2015

 

DSSSB PRT

VI. गर्भावस्था की विशेषताएँ

गर्भाधान से लेकर जन्म तक की अवस्था को कहा जाता है—

प्रसवपूर्व

UK TET (I-V) 06.11.2019
MP TET (IV) 2011

पैदा होने से पहले का विकास मुख्यतः तीन भागों में बँटा है—

जीवाणु, भ्रूण अवस्था, गर्भीय अवस्था

HP TET (JBT) June 2021

जन्मपूर्व विकास का सही क्रम है—

युग्मनज, भ्रूण, गर्भस्थ शिशु

CG TET (I-V) 2016

विकास शुरू होता है—

पूर्व प्रसव अवस्था

UP TET (I-V) 8 Jan. 2020
DSSSB Assistant Nurse Teacher
CTET-2012 (VI-VIII)

गर्भस्थ शिशु में संवेदनशीलता का विकास प्रारंभ होता है—

सिर से

Bihar TET Paper-II (Class VI-VIII) 2013

गर्भ में बालक को विकसित होने में कुल दिन लगते हैं—

280

Bihar TET 2011 (I-V)

VII. शैशवावस्था की विशेषताएँ

6 या 7 वर्ष का बालक दूसरों के विचारों को स्वीकार करने के योग्य नहीं होता, क्योंकि—
वह आत्म केन्द्रित होता है

Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2011

दो वर्ष की समाप्ति पर एक शिशु का शब्द ज्ञान होता है—

150 शब्द

HP TET (Arts) Feb. 2013

 


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