• 18.6.20

    भारत शासन अधिनियम 1935

    भारत शासन अधिनियम 1935
    इस अधिनियम के पारित होने के पूर्व भारत के शासन का स्वरूप एकात्मक था लेकिन इस अधिनियम द्वारा भारत में सर्वप्रथम संघात्मक सरकार की स्थापना की गई, भारतीय संघ का निर्माण भारतीय प्रांतों तथा देशी रियासतों से मिलकर होना था, प्रांतों का संघ में विलय अनिवार्य था जबकि देसी रियासतों का विलय ऐच्छिक था परंतु कुछ देसी रियासतों के प्रतिकूल रवैये के कारण भारतीय संघ व्यावहारिक रूप से अस्तित्व में नहीं आ सका।
    यह अधिनियम एक लंबा एवं जटिल प्रलेख था इसमें 321 अनुच्छेद एवं 10 अनुसूचियां थी इस अधिनियम की महत्वपूर्ण विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
    1. इसके द्वारा संघ सूची (59 विषय), प्रांतीय सूची(54 विषय) समवर्ती सूची (36 विषय) का निर्माण हुआ। संघ सूची पर कानून बनाने का अधिकार संघ सरकार को ,प्रांतीय सूची पर प्रांतीय सरकार को तथा समवर्ती सूची पर दोनों ही कानून बना सकते थे यदि समवर्ती सूची के किसी एक विषय पर संघ व प्रांत दोनों कानून बनाते थे तो संघ सरकार का कानून मान्य था।
    2. प्रांतोंं से द्वैध शासन प्रणाली समाप्त कर दी गई और उन्हें प्रांतीय स्वायत्तता दे दी गई लेकिन यह द्वैध शासन प्रणाली केंद्र मेंं लागू कर दी गई अर्थात संघ सूची के विषय को आरक्षित व हस्तानांतरित दो भागों में बांंट दिया गया।
    3. प्रांतीय स्वायत्तता से संबंधित उपबंध 1 अप्रैल 1937 को लागू हुआ तथा इसके अंतर्गत भारत के 11 प्रांतों मेंं चुनाव हुए, जिसमें 5 प्रांतों में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया औऱ असम व पश्चिमोत्ततर प्रांत में सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी और गठबंधन की सरकार बनाई।
    4. 11 में से 6 प्रांतों में विधानमंडल को द्विसदनात्मक बनाया गया।
    5. दो नए प्रांतों बिहार एवं उड़ीसा का निर्माण इसी एक्ट द्वारा हुआ।
    6. सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का विस्तार हुआ मुसलमानों और सिखों के साथ-साथ हरिजनोंं और ईसाइयोंं को भी अलग से प्रतिनिधित्व दिया गया इसलिए "आरक्षण एवं संरक्षण का अधिनियम" भी कहा जाता है।
    7. भारत में महिलाओं को पहली बार मताधिकार दिया गया लेकिन केवल उच्च वर्ग की महिलाओं को ही यह अधिकार प्राप्त था।
    8. इस अधिनियम द्वारा भारत में एक संघीय न्यायालय की स्थापना की गई लेकिन यह भारत का अंतिम अपीलीय न्यायालय नहींं था क्योंकि इसके विरुद्ध अपील ब्रिटेन स्थित प्रिबी काउंसिल में की जा सकती थी।
    9. इसके द्वारा भारत में संघ लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।
    10. इस अधिनियम द्वारा वर्मा को भारत से अलग कर दिया गया, अदन को ब्रिटिश उपनिवेश बना दिया गया तथा बरार को मध्य प्रांत का अंग घोषित कर दिया।
    इस एक्ट की आलोचना करते हुए पंडित नेहरू ने इसे दासता का एक नया चार्टर कहा ,पंडित नेहरू ने ही इसे ब्रेकरहित इंजन और इंजन रहित रेलगाड़ी की संज्ञा दी। इस एक्ट को निरंकुशता का भी एक्ट कहा जाता है।

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